नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और नेता आशुतोष रांका को रविवार सुबह दिल्ली की एक अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया।
तीनों नेताओं को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान के अंदर से हिरासत में लिया गया था। उन्हें रविवार सुबह 9 बजे दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद तीनों नेताओं को रिहा कर दिया गया।
विमान के अंदर से हिरासत में लिया गया
अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। वे जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे थे।
दिल्ली पुलिस की टीम विमान के उतरते ही अंदर पहुंच गई। सीजेपी द्वारा साझा किए गए वीडियो में दीपके को पुलिस अधिकारियों से यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘हम यहां गिरफ्तारी देने के लिए आए हैं, आइए और हमें गिरफ्तार कीजिए।’
हिरासत में लिए जाने से पहले पुलिसकर्मियों ने सीजेपी नेताओं से कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है।
तीनों नेताओं को पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107/151 के तहत एहतियातन हिरासत में रखा गया था।
दादी के निधन की सूचना पर विवाद
हिरासत के दौरान दीपके की 85 वर्षीय दादी सवित्रीबाई शंकरराव दीपके का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में निधन हो गया। उनका निधन शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे लंबी बीमारी के बाद हुआ।
दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि दीपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी पूरी संवेदनशीलता के साथ दी गई थी। पुलिस ने कहा कि उन्हें अंतिम संस्कार के समय के बारे में भी बताया गया और मानवीय आधार पर गांव जाने के लिए हरसंभव मदद की पेशकश की गई।
हालांकि, दीपके की मां अनीता दीपके ने दिल्ली पुलिस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘हम उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं। दिल्ली पुलिस झूठ बोल रही है। अगर उन्हें उनकी दादी की मौत की खबर मिलती, तो वे तुरंत आ जाते। हमने उनके लिए अंतिम संस्कार रोक दिया है।’
दीपके के पिता भगवान दीपके ने भी कहा कि परिवार अभिजीत से संपर्क नहीं कर पाया। उन्होंने दावा किया कि दीपके को दिल्ली से बाहर कहीं शिफ्ट किया गया है।
शनिवार को दिल्ली में व्यापक हिरासत
शनिवार को दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। जंतर-मंतर को सील कर दिया गया था और केंद्रीय दिल्ली में बैरिकेड लगाए गए थे।
दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 40,000 जवान तैनात किए गए थे। मेट्रो के 45 स्टेशनों पर सेवाएं बंद कर दी गई थीं।
पुलिस ने 3,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें यूट्यूबर ध्रुव राथी और कई विपक्षी नेता शामिल थे। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और पिनराई विजयन भी हिरासत में लिए गए थे।
ध्रुव राथी को रविवार तड़के करीब 3 बजे रिहा किया गया।
अजिंक्य शिंदे को सौंपी कमान
हिरासत में लिए जाने से पहले दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें उन्होंने अजिंक्य शिंदे को आंदोलन की कमान सौंपी।
दीपके ने वीडियो में कहा, ‘हैलो एवरीवन, अगर आप यह वीडियो देख रहे हैं, तो इसका मतलब है कि मैं, आशु और सौरव, हम तीनों गिरफ्तार हो चुके हैं। हमारे बाद, अजिंक्य इस आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।’
अजिंक्य शिंदे महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े थे और महाराष्ट्र यूथ विंग के राज्य संयोजक रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जारी
सीजेपी का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित है। पार्टी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगा रही है।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर अलग से प्रदर्शन किए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो। टाइम टू रिजाइन।’
सीजेपी ने कहा है कि वह रविवार को फिर से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश करेगी। पार्टी का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी।





