ट्रम्प प्रशासन द्वारा लागू किए जा रहे US immigration hurdles ने भारत से संयुक्त राज्य अमेरिका में काम करने, पढ़ने और यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए नई चुनौतियाँ पेश कर दी हैं। पिछले वर्ष में कई नियमों में बदलाव, शुल्क में वृद्धि और कड़ी स्क्रीनिंग प्रक्रियाएँ लागू की गईं, जिससे H‑1B कार्य वीज़ा धारकों, उनके H‑4 आश्रितों, F‑1 छात्र वीज़ा धारकों और B‑1/B‑2 पर्यटक वीज़ा आवेदकों को सीधे असर पड़ा है। यह लेख इन परिवर्तनों का विस्तृत विवरण, उनके प्रभाव और भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया को प्रस्तुत करता है।
संयुक्त राज्य गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने पिछले साल के सितंबर में नई H‑1B पिटिशन पर $100,000 का शुल्क प्रस्तावित किया, जो बाद में अदालत द्वारा रोक दिया गया। फिर भी, अगस्त 2026 में DHS ने $103,265 का अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया, जो अभी तक सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं हुआ है। साथ ही, FY2027 के लिए वेतन‑आधारित H‑1B चयन प्रणाली पेश की गई, जिससे उच्च वेतन वाले पदों को अधिक अंक मिलते हैं और कम वेतन वाले शुरुआती‑स्तर के कर्मचारियों तथा छोटे नियोक्ताओं की प्रतिस्पर्धा कठिन हो गई है।
H‑1B वीज़ा पर बढ़ता वित्तीय बोझ
H‑1B वीज़ा धारकों में भारतीयों का प्रतिशत सबसे अधिक है, और नई शुल्क संरचना ने नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के लिए वित्तीय दबाव बढ़ा दिया है। उच्च शुल्क के कारण कई कंपनियों ने नई पिटिशन दाखिल करने में संकोच दिखाया है, जिससे भारतीय पेशेवरों की रोजगार संभावनाएँ सीमित हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, दिसंबर 2025 से H‑1B आवेदकों और उनके आश्रितों को अपनी सभी सामाजिक मीडिया प्रोफ़ाइल सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करने और ऑनलाइन उपस्थिति की जाँच के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। USCIS ने इसे सुरक्षा कारणों से बताया है, पर कई अधिकार समूहों ने गोपनीयता उल्लंघन के रूप में इसकी आलोचना की है।
H‑4 आश्रितों के रोजगार अधिकारों पर खतरा
H‑4 वीज़ा, जो H‑1B धारकों के जीवनसाथी को दिया जाता है, पर भी नई नीति का असर स्पष्ट है। प्रशासन ने H‑4 Employment Authorization Document (EAD) को समाप्त करने की प्रस्तावना की है, जिससे 2015 में शुरू हुए कार्य अधिकार वापस ले लिये जा सकते हैं। इस प्रस्ताव ने विशेष रूप से भारतीय परिवारों को चिंतित किया है, जहाँ कई H‑4 आश्रितों ने अमेरिकी कार्य बाजार में स्थापित करियर बना रखे हैं। मौनिका, मिसौरी में रहने वाली एक H‑4 धारक, ने कहा, “मेरे पति ने स्थायी निवास के लिए आवेदन किया है, और मेरे पास EAD है जिससे मैं परिवार की आर्थिक मदद कर रही हूँ। अब सरकार इस कार्यक्रम को समाप्त करने की योजना बना रही है, जिससे हमारा भविष्य अनिश्चित हो गया है।”
F‑1 छात्र वीज़ा में नई सीमाएँ
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा परिवर्तन “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (D/S)” की समाप्ति है। पहले छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखने तक वैध रहने की गारंटी रखते थे, पर अब नई नियमावली के अनुसार 04 वर्ष की अधिकतम अवधि या कोर्स की अवधि, जो भी कम हो, लागू होगी। यह नियम 15 सितंबर से लागू होगा और कई छात्रों को कोर्स पूरा करने से पहले ही देश छोड़ने की स्थिति में डाल सकता है। इस परिवर्तन के खिलाफ NAFSA और कई शैक्षणिक एवं श्रम संगठनों ने 18 अगस्त को मुकदमा दायर किया, जिसमें प्रशासन को इस कदम को रोकने की मांग की गई है।
इसके अलावा, 2025 में अमेरिकी State Department ने नए छात्र और एक्सचेंज‑विज़िटर वीज़ा अपॉइंटमेंट को अस्थायी रूप से रोक दिया था, ताकि विस्तारित सामाजिक मीडिया स्क्रीनिंग की तैयारी की जा सके। अब F‑1 आवेदकों को भी ऑनलाइन उपस्थिति की जाँच का सामना करना पड़ेगा, जिससे सामाजिक‑मीडिया गतिविधियों का वीज़ा निर्णय पर प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है। प्रशासन ने कुछ प्रोटेस्ट‑पैलेस्टीन सक्रियता में शामिल विदेशी छात्रों के वीज़ा रद्द कर उन्हें इमिग्रेशन कार्रवाई का सामना करने के लिए भी कदम उठाए हैं, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्न उठे हैं।
पर्यटक व B‑1/B‑2 वीज़ा पर बंधक प्रणाली
पर्यटक और व्यावसायिक यात्रियों के लिए भी नई बाधाएँ पेश की गई हैं। “वीज़ा‑बॉन्ड” कार्यक्रम के तहत, B‑1 या B‑2 वीज़ा प्राप्त करने वाले यात्रियों को $5,000 से $15,000 तक की जमा राशि रखनी होगी, जिसे शर्तें पूरी करने पर वापस किया जा सकता है। यह उपाय प्रशासन द्वारा “अवैध प्रवास” को रोकने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है, पर कई यात्रा एजेंसियों ने इसे आर्थिक बोझ के रूप में आलोचना की है। साथ ही, इंटरव्यू‑विवर योग्यता में भी कटौती की गई है, जिससे कई आवेदकों को व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए बुलाया जा रहा है, जो प्रक्रिया को लंबा और जटिल बनाता है।
समग्र प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ
US immigration hurdles के तहत ये सभी परिवर्तन भारतीय प्रवासियों के जीवन को कई पहलुओं में प्रभावित कर रहे हैं। उच्च शुल्क और कड़ी स्क्रीनिंग ने नियोक्ताओं को भारतीय प्रतिभा को आकर्षित करने में हिचकिचाहट पैदा की है, जबकि छात्रों को शैक्षणिक योजना में पुनः विचार करना पड़ रहा है। H‑4 आश्रितों की रोजगार अधिकारों की अनिश्चितता ने कई परिवारों को आर्थिक तनाव में डाल दिया है। सामाजिक‑मीडिया जांच के विस्तार ने व्यक्तिगत गोपनीयता के मुद्दे को भी उजागर किया है, जिससे नागरिक अधिकार संगठनों की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं।
इन नीतियों की वैधता और दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर कई कानूनी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। अदालतों ने कुछ शुल्क प्रस्तावों को रोक दिया है, पर कई अन्य प्रस्ताव अभी भी प्रस्तावित चरण में हैं। यदि प्रशासन इन उपायों को लागू करता रहा, तो भारतीय प्रवासियों की संख्या में संभावित गिरावट, उच्च शिक्षा संस्थानों में विदेशी छात्र प्रविष्टि में कमी, और अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी देखी जा सकती है। वहीं, भारतीय सरकार भी इन चुनौतियों को देखते हुए अपने नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों की जानकारी देने और द्विपक्षीय संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठा रही है।
निष्कर्ष
US immigration hurdles ने भारतीय समुदाय के विभिन्न वर्गों—कामगार, छात्र, आश्रित और पर्यटक—पर गहरा प्रभाव डाला है। उच्च शुल्क, सामाजिक‑मीडिया स्क्रीनिंग, रोजगार अधिकारों की संभावित समाप्ति और वीज़ा बंधक जैसी नई शर्तें अनिश्चितता को बढ़ा रही हैं। इन परिवर्तनों के जवाब में कई समूह कानूनी और सामाजिक प्रतिरोध कर रहे हैं, पर नीति में बदलाव का अंतिम स्वरूप अभी भी स्पष्ट नहीं है। भारतीय प्रवासियों को इन चुनौतियों के प्रति सतर्क रहना होगा और संभावित विकल्पों की तैयारी करनी होगी, जबकि अमेरिकी नीति निर्माताओं को इन उपायों के दीर्घकालिक सामाजिक‑आर्थिक परिणामों पर पुनर्विचार करना आवश्यक है।
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