भारत के 78वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए एक ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1990 के दशक में “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” के रूप में पहचान बना ली, और आज वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है। यह बयान न केवल आर्थिक उपलब्धियों को उजागर करता है, बल्कि उन नीतियों और सुधारों की ओर इशारा करता है जिन्होंने इस परिवर्तन को संभव बनाया।
स्वतंत्रता दिवस के समारोह में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति को चार प्रमुख चरणों में विभाजित किया: “संकट के बाद पुनरुद्धार, वैश्विक मंच पर उदय, डिजिटल परिवर्तन और सतत विकास”। उन्होंने बताया कि 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद से भारत ने निरंतर उच्च विकास दर बनाए रखी है, जबकि कई विकसित देशों की वृद्धि दर घटती रही। इस संदर्भ में “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” का उल्लेख विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह भारत की दृढ़ता और नीति‑निर्माण की कुशलता को दर्शाता है।
स्वतंत्रता दिवस पर मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने “भुगतान प्रणाली, निर्यात, निवेश, और नवाचार” के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम और मेक‑इन इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो विदेशी निवेश को आकर्षित करने और रोजगार सृजन में मददगार साबित हुईं। इस संदर्भ में उन्होंने “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” को भारत की आर्थिक शक्ति का प्रतीक बताया, जो वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भी निरंतर बढ़ती रही।
‘Fragile 5’ से आज तक का आर्थिक सफर
1990 के दशक में भारत को “Fragile Five” देशों में गिना जाता था, जिनमें आर्थिक अस्थिरता, उच्च ऋण बोझ और कमजोर निर्यात संरचना प्रमुख चुनौतियां थीं। 1991 में आर्थिक उदारीकरण, विदेशी मुद्रा नियंत्रण में ढील और व्यापार नीतियों में सुधार ने इस स्थिति को बदल दिया। इसके बाद, 2000 के दशक में सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा निर्यात ने भारत को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया। इस परिवर्तन को “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” के रूप में परिभाषित किया गया, जो आज भी भारत की आर्थिक नीति के मूल में है।
आर्थिक सुधारों के प्रमुख स्तंभ
वित्तीय समावेशन, कर सुधार और बुनियादी ढाँचा विकास ने भारत की वृद्धि को गति दी। 2016 में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने कर प्रणाली को एकीकृत किया, जिससे व्यापार में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी। इसके अलावा, 2017 में शुरू किया गया “डिजिटल इंडिया” कार्यक्रम ने डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित किया, जिससे वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इन पहलों ने “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” की दिशा में भारत को स्थायी आधार प्रदान किया।
उद्योग और निर्यात में नई गति
औद्योगिक नीति 2020 और “मेक‑इन इंडिया” पहल ने भारत को विनिर्माण के केंद्र में बदलने का लक्ष्य रखा। इस दिशा में, भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश को आकर्षित किया। निर्यात में भी सुधार देखा गया; विशेष रूप से सेवा निर्यात में भारत ने विश्व में शीर्ष स्थान हासिल किया। ये सभी पहलें “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” के सिद्धांत को साकार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
सामाजिक विकास और शिक्षा में निवेश
आर्थिक विकास के साथ सामाजिक मानकों में भी सुधार हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में कई योजनाएँ लागू की गईं, जैसे कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आयुष्मान भारत। इन योजनाओं ने मानव पूँजी को सशक्त किया, जिससे उत्पादकता में वृद्धि हुई। इस संदर्भ में तेलंगाना समग्र शिक्षा योजना जैसी पहलें उल्लेखनीय हैं, जो शिक्षा के व्यापक कवरेज को सुनिश्चित करती हैं।
भविष्य की दिशा और चुनौतियां
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2030 तक 10% वार्षिक वृद्धि दर हासिल करना है। इसके लिए ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कौशल विकास जैसी चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” का सफर जारी रहेगा, यदि सरकार निरंतर नीतिगत सुधार और नवाचार को प्रोत्साहित करती रहे।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नई छवि
वित्तीय वर्ष 2023‑24 में भारत ने वैश्विक जीडीपी वृद्धि में सबसे अधिक योगदान दिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक ने भारत को “विकासशील अर्थव्यवस्था में प्रमुख चालक” के रूप में मान्यता दी। इस स्थिति ने भारत को व्यापार समझौतों, निवेश प्रवाह और रणनीतिक साझेदारियों में बेहतर स्थिति प्रदान की। इस विकास को “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” के रूप में वर्णित किया गया, जिससे भारत की आर्थिक शक्ति का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान बढ़ा।
राजनीतिक पहल और विधायी समर्थन
आर्थिक सुधारों को सुदृढ़ करने के लिए विधायी कदम भी उठाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, राज्यसभा द्वारा केरल नाम परिवर्तन बिल पास किया गया, जो केंद्र-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने के प्रयासों का हिस्सा है। ऐसे कदम आर्थिक नीतियों को स्थिरता प्रदान करते हैं और “फ्राजाइल 5 से सबसे तेज ग्रोथ” के लक्ष्य को साकार करने में मददगार होते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान ने यह स्पष्ट किया कि भारत ने “फ्राजाइल 5” की स्थिति से निकलकर विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि नीतियों, सुधारों और राष्ट्रीय एकजुटता का परिणाम है। आगे भी निरंतर सुधार, नवाचार और सामाजिक समावेशन पर ध्यान केंद्रित करके भारत इस गति को बनाए रखेगा और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।
यह लेख विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।







