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बेंगलुरु में 1,581 छोड़ी गई गाड़ियों को हटाने की शुरुआत 10 जुलाई से, शहर की साफ-सफाई के लिए

July 10, 2026 3:01 PM

बेंगलुरु के नगर निगम ने 10 जुलाई से शुरू किया है एक बड़ा सफ़ाई अभियान, जिसमें 1,581 छोड़ी गई गाड़ियों को हटाया जाना है। यह कदम शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को फिर से साफ़ और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस पहल को “बेंगलुरु गाड़ियाँ हटाना” के नाम से जाना जा रहा है और यह शहर में पहले कभी न देखे गये पैमाने पर चल रहा है।

बेंगलुरु गाड़ियाँ हटाना: 10 जुलाई से शुरू हुआ सफ़ाई अभियान

नगर निगम ने पिछले हफ्ते एक विस्तृत योजना के तहत घोषणा की कि 10 जुलाई से लेकर अगले कुछ हफ्तों में, शहर के विभिन्न हिस्सों में फैली 1,581 अनधिकृत और अनदेखी गाड़ियों को हटाया जाएगा। यह कार्यवाहियाँ मुख्य रूप से फुटपाथों, पार्किंग क्षेत्रों और सार्वजनिक मार्गों पर लगी हुई थीं। नगर निगम के प्रमुख ने बताया कि यह कार्रवाई ‘अनियमित पार्किंग और गाड़ियों के कब्जे’ पर सरकार के सख्त नियमों के अनुरूप है।

अभियान का पृष्ठभूमि

बेंगलुरु के ट्रैफ़िक और सड़क सुरक्षा विभाग ने पहले ही ‘क्लीनर सिटी’ योजना के अंतर्गत गाड़ियों को हटाने के लिए कई चेतावनी नोटिस जारी किये थे। लेकिन कई बार इन नोटिसों के बावजूद गाड़ियाँ वहीं रहती थीं, जिससे फुटपाथ पर भीड़ बढ़ती और सड़कें जाम हो जाती थीं। 2024 में जारी ‘सड़क सुरक्षा और स्वच्छता नियम’ के अनुसार, किसी भी वाहन को सार्वजनिक मार्ग पर 30 दिनों से अधिक समय तक बिना मालिक के रहने पर उसे हटाने का आदेश दिया जा सकता है।

इस पृष्ठभूमि में, ‘बेंगलुरु गाड़ियाँ हटाना’ अभियान को न सिर्फ़ ट्रैफ़िक में सुधार के लिये, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सौंदर्य को बढ़ाने के लिये भी शुरू किया गया है। शहर के कई हिस्सों में, खासकर मिड-डे ट्रेडिंग और शॉपिंग एरिया, गाड़ियाँ जाम के कारण पैदल यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर रही थीं।

क्यों महत्वपूर्ण है?

पहले से ही शहर की ट्रैफ़िक भीड़ में 25% की वृद्धि देखी जा रही थी। गाड़ियों का अनियंत्रित कब्जा, खासकर फुटपाथ पर, पैदल यात्रियों के लिए खतरनाक था। इसके अलावा, ये गाड़ियाँ जलवायु परिवर्तन के तहत बासी हवा और धूल का स्रोत बन गई थीं। बेंगलुरु गाड़ियाँ हटाना के माध्यम से शहर के अधिकारियों का उद्देश्य है कि सड़कें साफ़ हों, सार्वजनिक स्थानों पर पुनः उपयोग के लिए जगह बने और ट्रैफ़िक प्रवाह में सुधार हो।

साथ ही, यह कदम ‘स्मार्ट सिटी’ के लक्ष्यों के साथ मेल खाता है, जहाँ शहर के डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जाता है।

कदम और कार्यप्रणाली

नगर निगम ने 5 किलोमीटर लंबी सड़कों और 10 सार्वजनिक पार्कों में गाड़ियों को हटाने की योजना बनाई है। इस कार्य में निम्नलिखित चरण शामिल हैं:

  • पहले, गाड़ियों की सूची और स्थान की पहचान करने के लिये GIS आधारित मानचित्रण किया गया।
  • इसके बाद, गाड़ी मालिकों को 15 दिन का नोटिस भेजा गया, जिसमें उन्हें गाड़ी हटाने का निर्देश दिया गया।
  • नोटिस के बाद भी यदि गाड़ी नहीं हटाई गई, तो गाड़ी को टो करके ‘रिसाइक्लिंग सेंटर’ भेजा जायेगा।
  • सभी हटाई गई गाड़ियों को ‘कम्पोस्टिंग और रीसाइक्लिंग’ के लिये अलग-अलग केंद्रों में भेजा जायेगा।
  • अभियान के दौरान, नागरिकों को ‘अनियमित पार्किंग’ के लिए ‘फाइन’ का भी प्रावधान है, जो कि ‘बेंगलुरु गाड़ियाँ हटाना’ के अंतर्गत आता है।

इस प्रक्रिया का समर्थन करने के लिये, नगर निगम ने ‘ट्रैफ़िक ड्राइव’ के तहत ‘अनरेगुलेटेड पार्किंग फाइन’ के नए नियम लागू किये हैं। इस नियम के तहत, अनियमित पार्किंग पर 500 रुपये से 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया और प्रभाव

अभियान के शुरू होने के बाद से ही, कई नागरिकों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने यह बताया कि गाड़ियों के हटने से फुटपाथ पर चलने का अनुभव बेहतर हुआ है। वहीं, कुछ वाहन मालिकों ने यह भी जताया कि नोटिस के बाद उन्हें गाड़ी हटाने में समय और लागत का सामना करना पड़ा।

नगर निगम की वेबसाइट पर प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, पहले 48 घंटे में 200 से अधिक गाड़ियाँ हटाई जा चुकी हैं। इसके अलावा, गाड़ियों के हटने से शहर की ‘क्लीनर सिटी’ रैंकिंग में भी सुधार देखने को मिल रहा है।

इस अभियान का एक और प्रभाव यह है कि यह ‘इलेक्ट्रिक वाहन’ (EV) के लिए भी मार्ग प्रशस्त कर रहा है। क्योंकि शहर में EV चार्जिंग स्टेशन की बढ़ती मांग के बीच, अनावश्यक गाड़ियों की जगह को पुनः उपयोग करने से इन स्टेशनों के लिए जगह बन सकती है। यदि आप EV के बारे में और जानना चाहते हैं, तो यह लेख पढ़ें।

भविष्य की योजनाएँ

नगर निगम ने घोषणा की है कि ‘बेंगलुरु गाड़ियाँ हटाना’ अभियान को 30 जुलाई तक विस्तारित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अगले वर्ष के बजट में ‘स्मार्ट पार्किंग सिस्टम’ और ‘ऑटोमेटेड टोलिंग’ के लिए ₹50 करोड़ का निवेश करने की योजना है। यह कदम शहर में ट्रैफ़िक प्रबंधन को और अधिक कुशल बनाने के लिए उठाया गया है।

इसके साथ ही, शहर में ‘फ्लीट मैनेजमेंट’ और ‘इलेक्ट्रिक बाइक’ के लिए भी नई नीतियाँ लागू की जाएंगी, ताकि भविष्य में गाड़ियों के अनावश्यक कब्जे को रोका जा सके।

सारांश में, ‘बेंगलुरु गाड़ियाँ हटाना’ अभियान ने शहर को साफ़, सुरक्षित और अधिक सुव्यवस्थित बनाया है। यह कदम न केवल ट्रैफ़िक में सुधार लाता है, बल्कि नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में भी योगदान देता है।

यह लेख विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।

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